प्रदोष व्रत 2049
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 1जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 16जन॰शनि प्रदोषशनिवार
- 31जन॰रवि प्रदोषरविवार
- 15फ़र॰सोम प्रदोषसोमवार
- 1मार्चसोम प्रदोषसोमवार
- 16मार्चभौम प्रदोषमंगलवार
- 31मार्चबुध प्रदोषबुधवार
- 15अप्रैलगुरु प्रदोषगुरुवार
- 29अप्रैलगुरु प्रदोषगुरुवार
- 15मईशनि प्रदोषशनिवार
- 28मईशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 13जूनरवि प्रदोषरविवार
- 27जूनरवि प्रदोषरविवार
- 12जुल॰सोम प्रदोषसोमवार
- 26जुल॰सोम प्रदोषसोमवार
- 11अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 25अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 9सित॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 24सित॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 8अक्टू॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 24अक्टू॰रवि प्रदोषरविवार
- 7नव॰रवि प्रदोषरविवार
- 22नव॰सोम प्रदोषसोमवार
- 6दिस॰सोम प्रदोषसोमवार
- 22दिस॰बुध प्रदोषबुधवार
प्रश्न-उत्तर
2049 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला शुक्र प्रदोष (शुक्रवार, 1 जनवरी 2049), अंतिम बुध प्रदोष (22 दिसंबर 2049)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।