एकादशी 2049
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 14जन॰पौष पुत्रदा एकादशीगुरुवार
- 29जन॰षट्तिला एकादशीशुक्रवार
- 13फ़र॰जया एकादशीशनिवार
- 28फ़र॰विजया एकादशीरविवार
- 15मार्चआमलकी एकादशीसोमवार
- 29मार्चपापमोचनी एकादशीसोमवार
- 14अप्रैलकामदा एकादशीबुधवार
- 28अप्रैलवरुथिनी एकादशीबुधवार
- 13मईमोहिनी एकादशीगुरुवार
- 27मईअपरा एकादशीगुरुवार
- 12जूननिर्जला एकादशीशनिवार
- 25जूनयोगिनी एकादशीशुक्रवार
- 11जुल॰देवशयनी एकादशीरविवार
- 25जुल॰कामिका एकादशीरविवार
- 9अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीसोमवार
- 24अग॰अजा एकादशीमंगलवार
- 8सित॰परिवर्तिनी एकादशीबुधवार
- 22सित॰इंदिरा एकादशीबुधवार
- 7अक्टू॰पापांकुशा एकादशीगुरुवार
- 22अक्टू॰रमा एकादशीशुक्रवार
- 5नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीशुक्रवार
- 21नव॰उत्पन्ना एकादशीरविवार
- 5दिस॰मोक्षदा एकादशीरविवार
- 20दिस॰सफला एकादशीसोमवार
प्रश्न-उत्तर
2049 में कितनी एकादशी हैं?
24 — पहली पौष पुत्रदा एकादशी (गुरुवार, 14 जनवरी 2049), अंतिम सफला एकादशी (20 दिसंबर 2049)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।