दीपावली पूजा किट 2026दीवाली पूजा की पूरी प्रक्रिया, और वर्ष भर समृद्धि कैसे बनी रहे
दीवाली के पाँचों दिन एक पन्ने पर: हमारे पंचांग इंजन से तारीखें और आपके शहर का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, सामग्री की सूची जिसे टिक करके छाप सकते हैं, मंत्रों सहित क्रम से लक्ष्मी-गणेश पूजा, पढ़ने-सुनने के पाठ, और समृद्धि का ज्योतिष: दीवाली की रात आकाश में क्या होता है, आपकी चन्द्र राशि से वर्ष का एक उपाय, और साइन-इन हों तो आपकी अपनी कुंडली से संकेत।

दीपावली 2026 के पाँच दिन
तारीखें नई दिल्ली की, द्रिक पंचांग के नियमों से; दूसरे शहरों में दिन वही रहता है। हर दिन का पूरा पाठ पुस्तकालय में है।
- शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
दिन 1 · कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी
धनतेरस
धन्वंतरि जयंती और पर्व का आरंभ। नई धातु की वस्तु खरीदें, प्रदोष काल में कुबेर-लक्ष्मी-धन्वंतरि की पूजा करें और मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर यम दीप रखें।
- घर और पूजा-स्थल साफ़ करें; मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ और पूजा सामग्री आज ही ले आएँ
- धातु की वस्तु खरीदें: बर्तन, चाँदी या सोना, और कुछ नहीं तो साबुत धनिया
- संध्या: प्रदोष काल में कुबेर-लक्ष्मी-धन्वंतरि पूजा, तेरह दीपक, फिर यम दीपदान
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 18:02–19:57 · प्रदोष काल 17:33–19:57 (नई दिल्ली)
कथा और विधि पढ़ें - शनिवार, 7 नवंबर 2026
दिन 2 · कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी
नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली)
नरकासुर पर श्रीकृष्ण की विजय। सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान, संध्या में यम का दीप, और बहुत घरों में हनुमान पूजा — कार्तिक गणना से हनुमान जयंती।
- सूर्योदय से पहले: तेल मालिश और उबटन से अभ्यंग स्नान
- रंगोली, तोरण और दीपों की जगहें तय कर लें; झालर जाँच लें
- संध्या: चौदह दीप, द्वार पर एक यम के लिए; परिवार की रीत हो तो हनुमान चालीसा
- रविवार, 8 नवंबर 2026
दिन 3 · कार्तिक अमावस्या
दीपावली · लक्ष्मी पूजा
मुख्य रात। प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न में लक्ष्मी-गणेश पूजा, व्यापार में बहीखाता पूजन, घर के हर कोने में दीप, और रात का जागरण।
- प्रातः: जो रखते हैं उनके लिए पितृ तर्पण; स्नान, नए या स्वच्छ वस्त्र, पूर्व या उत्तर की ओर मुख वाली चौकी
- संध्या: नीचे दिए मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश पूजा, फिर आरती, प्रसाद और दीपदान
- मुख्य दीप रात भर जलता रहे; पूजा के बाद झाड़ू न लगाएँ
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 17:54–19:50 · प्रदोष काल 17:31–19:55 (नई दिल्ली)
कथा और विधि पढ़ें - मंगलवार, 10 नवंबर 2026
दिन 4 · कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा
गोवर्धन पूजा · अन्नकूट
श्रीकृष्ण का गोवर्धन धारण। प्रातः या सायं मुहूर्त में गोबर या अन्न का गोवर्धन पूजा जाता है, गायों का शृंगार, और छप्पन भोग का अन्नकूट। गुजरात में यह नया साल (बेस्तु वरस) है।
- गोबर या अन्न का गोवर्धन बनाएँ, परिवार सहित सात परिक्रमा करें
- अन्नकूट (अन्न, सब्ज़ियाँ, मिठाई) अर्पित करें और बाँटें
- जहाँ गाय हों, उन्हें नहलाकर सजाएँ और हरा चारा खिलाएँ
प्रातःकाल मुहूर्त 06:40–08:50 · सायंकाल मुहूर्त 15:20–17:30 (नई दिल्ली)
कथा और विधि पढ़ें - बुधवार, 11 नवंबर 2026
दिन 5 · कार्तिक शुक्ल द्वितीया
भाई दूज · यम द्वितीया
यमुना का अपने भाई यम को भोजन कराना। बहन अपराह्न मुहूर्त में भाई को तिलक करती है, भोजन कराती है, और भाई उपहार व रक्षा का वचन देता है। पर्व का समापन।
- बहन: रोली, अक्षत, मिठाई और नारियल (गोला) की थाली; अपराह्न मुहूर्त में तिलक
- भाई: बहन के घर या हाथ का भोजन, उपहार
- यमुना के पास रहने वाले यमुना स्नान; बाकी यम-यमुना को अर्घ्य
अपराह्न काल 13:10–15:20 (नई दिल्ली)
कथा और विधि पढ़ें
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2026, आपके शहर के लिए
धनतेरस
6 नव॰- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
- 18:02 – 19:57
- प्रदोष काल
- 17:33 – 19:57
- वृषभ लग्न (स्थिर लग्न)
- 18:02 – 19:58
सूर्योदय 06:37 · सूर्यास्त 17:33 · कृष्ण त्रयोदशी 10:31 (6 नव॰) से 10:48 (7 नव॰) तक
दीपावली · लक्ष्मी पूजा
8 नव॰- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
- 17:54 – 19:50
- प्रदोष काल
- 17:31 – 19:55
- वृषभ लग्न (स्थिर लग्न)
- 17:54 – 19:50
- सिंह लग्न (निशीथ काल)
- 00:25 – 02:42 (9 नव॰)
सूर्योदय 06:38 · सूर्यास्त 17:31 · अमावस्या 11:28 (8 नव॰) से 12:32 (9 नव॰) तक
गोवर्धन पूजा · अन्नकूट
10 नव॰- प्रातःकाल मुहूर्त
- 06:40 – 08:50
- सायंकाल मुहूर्त
- 15:20 – 17:30
सूर्योदय 06:40 · सूर्यास्त 17:30 · शुक्ल प्रतिपदा 12:32 (9 नव॰) से 14:00 (10 नव॰) तक
भाई दूज · यम द्वितीया
11 नव॰- अपराह्न काल
- 13:10 – 15:20
सूर्योदय 06:40 · सूर्यास्त 17:30 · शुक्ल द्वितीया 14:00 (10 नव॰) से 15:53 (11 नव॰) तक
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त = सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल जहाँ स्थिर वृषभ लग्न से मिले — द्रिक पंचांग का नियम। सिंह लग्न (आधी रात के बाद) व्यापारी और रात्रि-जागरण वाले लेते हैं। धनतेरस का मुहूर्त भी प्रदोष-वृषभ का मेल है।
सामग्री सूची
टिक करते जाएँ (यह ब्राउज़र याद रखता है) और बाज़ार के लिए छाप लें। जो न मिले, उसके बिना भी पूजा होती है: भाव सामग्री से बड़ा है।
0/25 सामग्री तैयार · दीपावली 2026 · jyotishjagat.com/diwali
मूर्तियाँ और आसन
कलश
पूजन सामग्री
दीप
नैवेद्य और प्रसाद
दुकान या व्यापार के लिए
लक्ष्मी-गणेश पूजा, चरण-दर-चरण
घर की पूजा के लिए, बिना पंडित के। मंत्र जैसे लिखे हैं वैसे बोलें; संस्कृत कठिन लगे तो हिंदी में भाव बोल दें। पूरी विधि और कथा
- 1
स्थान की तैयारी
सूर्यास्त के बाद स्नान करें, स्वच्छ या नए वस्त्र पहनें। घर के ईशान कोण में, या पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके, चौकी पर वस्त्र बिछाकर चावल का आसन बनाएँ और उस पर गणेश-लक्ष्मी को विराजित करें — लक्ष्मी गणेश के दाहिनी ओर। सामने रोली से स्वस्तिक बनाएँ। मुख्य घी का दीपक देवताओं के दाहिनी ओर और एक छोटा दीप बाईं ओर जलाएँ।
- 2
आचमन और संकल्प
दाहिनी हथेली से तीन बार आचमन करें, फिर मंत्र के साथ स्वयं और सामग्री पर जल छिड़कें। दाहिने हाथ में अक्षत, फूल और सिक्का थोड़े जल के साथ लेकर संकल्प बोलें: अपना नाम, गोत्र, स्थान, दिन (कार्तिक अमावस्या, संवत) और कामना — घर की स्थायी समृद्धि के लिए लक्ष्मी-गणेश पूजन। जल थाली में छोड़ दें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
- 3
कलश स्थापना
कलश में जल भरें, सुपारी, सिक्का और कुछ दाने चावल डालें, मुख पर पाँच आम के पत्ते और ऊपर नारियल रखें, गले में मौली बाँधें और उसे लक्ष्मी के पास चावल पर स्थापित करें। उस पर स्वस्तिक बनाएँ। कलश वरुण और सब तीर्थों का प्रतीक है; रोली, अक्षत और फूल से उसकी पूजा करें।
- 4
पहले गणेश पूजन
कोई पूजा गणेश के बिना नहीं होती। उन्हें जल, रोली-चंदन का तिलक, अक्षत, दूर्वा, फूल, जनेऊ, धूप, दीप और मोदक या लड्डू अर्पित करें, मंत्र के साथ। निर्विघ्न पूजा की प्रार्थना करें।
ॐ गं गणपतये नमः
- 5
लक्ष्मी का षोडशोपचार
हृदय के पास फूल लेकर लक्ष्मी का आवाहन करें, आसन दें, पाद्य, आचमन, पंचामृत और फिर शुद्ध जल से स्नान, वस्त्र और चुनरी, चंदन-कुमकुम, अक्षत, माला और कमल, इत्र, धूप, दीप, खील-बताशे और मिठाई का नैवेद्य, सुपारी सहित पान, दक्षिणा का सिक्का, और प्रदक्षिणा। लक्ष्मी मंत्र माला से या उँगलियों पर 11 या 108 बार जपें।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः
मंत्र के बाद महालक्ष्मी अष्टकम् - 6
कुबेर, बहीखाता और तिजोरी
गल्ला, आभूषण या सिक्का, और नया बहीखाता लक्ष्मी के सामने रखें। पहले पन्ने पर स्वस्तिक बनाकर 'शुभ लाभ' और नए वर्ष की तिथि लिखें। कुबेर की रोली-अक्षत से पूजा करें — लक्ष्मी जो दें, उसकी रक्षा की प्रार्थना। व्यापारी पूरा बहीखाता पूजन करते हैं और कर्मचारी तिलक लेते हैं।
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा
- 7
सरस्वती और काम के साधन
कलम, पुस्तकों, लैपटॉप या अपने काम के औज़ारों को, और जल के कलश को तिलक करें। लक्ष्मी वहीं ठहरती हैं जहाँ विद्या और कर्म का सम्मान हो।
- 8
श्री सूक्त, चालीसा या कनकधारा
एक पाठ, सब मिलकर: अधिकांश घरों में लक्ष्मी चालीसा, जहाँ संस्कृत सहज हो वहाँ कनकधारा स्तोत्र, पंडित के साथ श्री सूक्त। बच्चे पाठ पुस्तकालय के पन्ने से पढ़ें; जो न पढ़ सकें उनके लिए पेज पर सुनने का प्लेयर है।
लक्ष्मी चालीसा, अर्थ और ऑडियो सहित - 9
आरती
पहले गणेश जी की आरती 'जय गणेश देवा', फिर लक्ष्मी जी की 'ॐ जय लक्ष्मी माता', और बहुत घरों में उसके बाद 'ॐ जय जगदीश हरे'। कपूर या घी का दीपक, घंटी और शंख; आरती सबको दें, लौ पर हाथ फेरकर आँखों से लगाएँ।
ॐ जय लक्ष्मी माता, आरती ऑडियो सहित - 10
दीपदान: दीप घर भर में
पूजा के दीप से हर दीप जलाएँ: पहले मुख्य द्वार (दोनों ओर), फिर तुलसी, रसोई, जल-स्थान, हर कमरे की देहरी, सीढ़ियाँ, छत की मुँडेर और पिछला द्वार — कोई कोना अँधेरा न रहे। पितरों के लिए दीप, और रीत हो तो चौराहे या मंदिर में एक।
- 11
प्रसाद और रात
खील-बताशे और मिठाई सबको बाँटें, पहले बड़ों को, और कुछ पड़ोसियों को भेजें। पूजा के बाद भोजन करें। मुख्य दीप रात भर जलता रहे, पूजा के बाद झाड़ू न लगाएँ, घर देर तक जगमग और जागता रहे — कहा जाता है लक्ष्मी जागते घर में आती हैं।
- 12
अगली सुबह
सूर्योदय से पहले घर बाहर की ओर बुहारें और पुराने साल का कूड़ा बाहर करें: यही अलक्ष्मी निस्सारण है — दरिद्रता को विदा। फिर प्रातः मुहूर्त में गोवर्धन पूजा।
पढ़ने और सुनने के पाठ
हर पाठ अर्थ सहित, और सदस्यों के लिए सुनने का प्लेयर। पूजा के समय फ़ोन पर खोल लें।
दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि
Diwali Lakshmi-Ganesh Puja Vidhi
कार्तिक अमावस्या की रात — राम के अयोध्या आगमन और लक्ष्मी के प्राकट्य की कथा, लक्ष्मी-गणेश पूजा की पूरी विधि, बहीखाता पूजन, दीपदान और रंगोलीThe night of the Kartik new moon: Rama's return to Ayodhya and the appearance of Lakshmi, the Lakshmi-Ganesh puja step by step, the ledger puja, the lamps and the rangoli
श्री लक्ष्मी चालीसा
Lakshmi Chalisa
धन, सुख और समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी की चालीसा, हर दोहे और चौपाई के अर्थ सहितThe Chalisa of Lakshmi, goddess of wealth and well-being, with the meaning of every doha and chaupai
ॐ जय लक्ष्मी माता
Om Jai Lakshmi Mata
श्री लक्ष्मी जी की आरती, गीता प्रेस के पाठ से, हर पद के अर्थ सहितThe aarti of Lakshmi in the Gita Press reading, with the meaning of every stanza
महालक्ष्म्यष्टकम्
Mahalakshmi Ashtakam
इन्द्र द्वारा की गई महालक्ष्मी की स्तुति, 'नमस्तेऽस्तु महामाये', आठ श्लोक और फलश्रुति, हर श्लोक के अर्थ सहितIndra's hymn to Mahalakshmi, Namaste'stu Mahamaye: eight verses and the verses of merit, with the meaning of each
श्रीकनकधारास्तोत्रम्
Shri Kanakadhara Stotram
आदि शंकराचार्य से जोड़ी जाने वाली लक्ष्मी-स्तुति, 'अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती': गीता प्रेस के पाठ से 18 श्लोक, हर श्लोक के अर्थ सहितThe hymn to Lakshmi traditionally attributed to Adi Shankaracharya, Angam Hareh Pulakabhushanam: all 18 shlokas from the Gita Press text, with the meaning of each
जय गणेश देवा
Jai Ganesh Deva
श्री गणेश जी की आरती, अर्थ सहितThe Ganesh aarti sung before every puja, with the meaning of every stanza
धनतेरस पूजा विधि और कथा
Dhanteras Puja Vidhi and Katha
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी — धन्वंतरि जयंती और धनत्रयोदशी: राजा हिम के पुत्र और यम की कथा, यम दीपदान, खरीदारी, कुबेर-लक्ष्मी पूजा और तेरह दीपकKartik Krishna Trayodashi, Dhanvantari Jayanti and Dhantrayodashi: the story of King Hima's son and Yama, the Yama lamp, what to buy, the Kuber-Lakshmi puja and the thirteen lamps
गोवर्धन पूजा कथा और विधि
Govardhan Puja Katha and Vidhi
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा की गोवर्धन पूजा — श्रीकृष्ण, इंद्र का क्रोध और गिरिराज की कथा, गोबर के गोवर्धन और अन्नकूट की पूजा विधिGovardhan Puja on Kartik Shukla Pratipada, the day after Diwali: how Krishna lifted the hill against Indra's rain, and how to make and worship the Govardhan of cow dung with the Annakut
भाई दूज की कथा और तिलक विधि
Bhai Dooj Katha and Tilak Vidhi
कार्तिक शुक्ल द्वितीया की यम द्वितीया — यमुना और उनके भाई यमराज की कथा, बहन के तिलक की विधि और भाई-बहन की रीतियाँYama Dwitiya on Kartik Shukla Dwitiya: the story of Yamuna and her brother Yama, how the sister does the tilak, and the brother-sister customs of the day
व्रत कथाVrat Kathasवैभव लक्ष्मी व्रत कथा
Vaibhav Lakshmi Vrat Katha
शुक्रवार का माँ लक्ष्मी का व्रत — शीला और वृद्धा के रूप में आई लक्ष्मी की कथा, श्री यंत्र और आभूषण की पूजा-विधि, अष्ट लक्ष्मी, ग्यारह या इक्कीस शुक्रवार और उद्यापनThe Friday vrat of Mother Lakshmi: the story of Sheela and the old woman who was Lakshmi, the puja with the Shri Yantra and an ornament, the Ashta Lakshmi, eleven or twenty-one Fridays, and the udyapan
वर्ष भर समृद्धि: ज्योतिष
दीवाली की अमावस्या पर सूर्य और चन्द्र दोनों तुला में होते हैं — शुक्र की राशि, और शुक्र लक्ष्मी का ग्रह है। सूर्यास्त के बाद जो स्थिर वृषभ लग्न उदित होता है, वह भी शुक्र की राशि है; इसीलिए पूजा उसी में रखी जाती है — स्थिर लग्न में दिया धन ठहरता है, यह मुहूर्त का सूत्र है। कुंडली में धन का हिसाब चार जगह से होता है: द्वितीय भाव (संचित धन), एकादश भाव (लाभ), गुरु (धन-कारक) और शुक्र (लक्ष्मी-कारक)। इनके स्वामी जहाँ बैठे हों, वर्ष का उपाय वहीं से निकलता है।
नीचे चन्द्र राशि से वर्ष का एक उपाय है — अपनी राशि न पता हो तो यहाँ निकालें — और साइन-इन सदस्यों के लिए उनकी अपनी कुंडली से संकेत।
राशि अनुसार वर्ष का उपाय
मेषस्वामी मंगल
लाल फूल और घी के दीप से लक्ष्मी पूजा; मंगलवार को हनुमान चालीसा और महीने में एक बार मसूर या गुड़ का दान — इस राशि का मंगल कमाई में लगे, कलह में नहीं। दीवाली की रात उधार न दें।
वृषभस्वामी शुक्र
शुक्र लक्ष्मी का ही ग्रह है। पूजा में खीर या सफ़ेद मिठाई का भोग, वर्ष भर शुक्रवार का व्रत या वैभव लक्ष्मी व्रत, और शुक्रवार को कनकधारा स्तोत्र। पूजा-स्थल और तिजोरी स्वच्छ और सुगंधित रखें।
मिथुनस्वामी बुध
लक्ष्मी से पहले गणेश, सदा, दूर्वा और हरे वस्त्र के साथ। हर बुधवार हिसाब लिखकर पूरा रखें; महीने में एक बार हरी मूँग का दान या गाय को हरा चारा। बुध व्यापार और वाणी से धन देता है, दोनों साफ़ रखें।
कर्कस्वामी चन्द्र
पूजा में और वर्ष भर तिजोरी में चाँदी का सिक्का। हर पूर्णिमा को चन्द्र को अर्घ्य और श्री सूक्त या लक्ष्मी चालीसा; सोमवार संध्या को परिवार को खीर। इस राशि का चन्द्र तब बचत कराता है जब घर में शांति हो।
सिंहस्वामी सूर्य
सूर्योदय पर लाल फूल के साथ सूर्य अर्घ्य, रविवार को आदित्य हृदय, और हर महीने गेहूँ या गुड़ का दान। कमल से लक्ष्मी पूजा। सूर्य पद और नाम से कमाता है, इस वर्ष हर सौदे में अपनी बात रखें।
कन्यास्वामी बुध
लक्ष्मी-गणेश की साथ पूजा, बहीखाते सहित: इस राशि का धन क्रम और बारीकी में है। बुधवार को लक्ष्मी चालीसा, गल्ले पर हरा वस्त्र, और साल के अंत में बड़ी बचत के बजाय हर वेतन पर छोटी, निश्चित बचत।
तुलास्वामी शुक्र
दीवाली की अमावस्या तुला में आती है, शुक्र की अपनी राशि, इसीलिए यह रात लक्ष्मी की है। कार्तिक भर रोज़ महालक्ष्मी अष्टकम्; शुक्रवार को सफ़ेद वस्त्र या चावल का दान; द्वार पर वर्ष भर दीपों की जोड़ी, अकेला दीप नहीं।
वृश्चिकस्वामी मंगल
लक्ष्मी की मूर्ति के नीचे लाल वस्त्र और कलश में ताँबे का सिक्का। मंगलवार को हनुमान चालीसा, और साल का एक नियम: मंगलवार को न उधार दें न लें। इस राशि का मंगल साहस से पाता और छिपाव से खोता है, धन की बात परिवार को बताते रहें।
धनुस्वामी गुरु
गुरु धन का कारक है। चौकी पर पीला वस्त्र, भोग में चने की दाल और हल्दी, गुरुवार को गुरु मंत्र, और कार्तिक पूर्णिमा को सत्यनारायण कथा। इस वर्ष किसी भी अप्रत्याशित लाभ का दसवाँ भाग गुरु, मंदिर या विद्यार्थी को दें।
मकरस्वामी शनि
शनि धीरे और लंबे समय तक देता है। शनिवार संध्या पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीप, सर्दी में काले तिल या कंबल का दान, और शनि स्तोत्र। नियमित बचत चलती रहे; शनि आदत का फल देता है, जुए का नहीं। मिले तो नीले कमल या नीले फूल से लक्ष्मी पूजा।
कुम्भस्वामी शनि
फिर शनि, और सेवा ही मार्ग। दीवाली पर अपने यहाँ और आसपास काम करने वालों को भोजन कराएँ, शनिवार का दीप और तिल का दान रखें, शनि स्तोत्र पढ़ें। इस वर्ष धन समूह, संपर्क और लंबे परिश्रम से आएगा; कामगार से किया हर वादा निभाएँ।
मीनस्वामी गुरु
वर्ष भर हर संध्या तुलसी का दीप, लक्ष्मी के साथ विष्णु पूजा (लक्ष्मी वहीं ठहरती हैं जहाँ विष्णु हों), गुरुवार को हल्दी और पीला फूल, और कनकधारा स्तोत्र। यह राशि सहज देती है; देने का भाग निश्चित रखें, बाकी ठहरेगा।
सात आदतें, पूरे वर्ष के लिए
- हर संध्या सूर्यास्त (प्रदोष) पर द्वार या तुलसी पर एक दीप — वही घड़ी जिसमें दीवाली की पूजा रखी जाती है।
- शुक्रवार लक्ष्मी का दिन: पूजा-स्थल की सफ़ाई, सफ़ेद या गुलाबी फूल, एक बार चालीसा या अष्टकम्।
- हिसाब लिखा हुआ: घर या दुकान का खाता हमेशा चालू रखें — लक्ष्मी की पूजा गणेश के साथ होती है, व्यवस्था के देव, अकेली नहीं।
- एक निश्चित भाग दान: दसवाँ, बीसवाँ, जो ईमानदारी से बने — मंदिर, विद्यार्थी, कामगार को — खर्च से पहले। दान समृद्धि-व्रत का वह आधा है जिसे अधिकांश छोड़ देते हैं।
- अमावस्या को, और मंगलवार-शनिवार को सूर्यास्त के बाद, न उधार दें, न लें, न भुगतान करें — व्यापार का पुराना नियम।
- हर पूर्णिमा को श्री सूक्त या लक्ष्मी चालीसा, और दीवाली के पंद्रहवें दिन कार्तिक पूर्णिमा को सत्यनारायण कथा।
- मुख्य द्वार साफ़, रोशन और खुला: कहा जाता है लक्ष्मी उसी से आती हैं और अँधेरे या अटे द्वार से लौट जाती हैं।
प्रश्न-उत्तर
2026 में दीवाली कब है?
लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है (कार्तिक अमावस्या, नई दिल्ली)। धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026; गोवर्धन पूजा और भाई दूज उसके बाद।
दीवाली 2026 का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली के लिए सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न का मेल: 17:54 – 19:50। अपने शहर का समय ऊपर चुनें; दिन पूरे भारत में वही रहता है।
दीवाली पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए?
लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ, लाल या पीले वस्त्र वाली चौकी, आम के पत्तों और नारियल वाला कलश, रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, मौली, फूल और माला, धूप, दीप, कपूर, पंचामृत, पान-सुपारी, खील-बताशे और मिठाई, और पूरे घर के लिए मिट्टी के दीये। ऊपर की पूरी सूची छापी जा सकती है।
लक्ष्मी पूजा किस क्रम में होती है?
आचमन और संकल्प, कलश, गणेश पूजन, फिर मंत्र सहित लक्ष्मी का षोडशोपचार, कुबेर और बहीखाता, काम के साधनों पर सरस्वती तिलक, एक पाठ (चालीसा, कनकधारा या श्री सूक्त), गणेश और लक्ष्मी की आरती, घर के हर कोने में दीप, और प्रसाद।
दीवाली पर कौन-सा मंत्र जपें?
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः, 11 या 108 बार; या छोटा ॐ महालक्ष्म्यै नमः। पहले गणेश का ॐ गं गणपतये नमः।
लक्ष्मी की पूजा अमावस्या की रात क्यों?
दीवाली की अमावस्या पर सूर्य और चन्द्र तुला में होते हैं, शुक्र की राशि, और शुक्र लक्ष्मी का ग्रह है; सूर्यास्त के बाद उदित स्थिर वृषभ लग्न भी शुक्र की राशि है। दीप वर्ष की सबसे अँधेरी रात का उत्तर हैं, और पुराने व्यापारिक वर्ष के खाते इसी रात बंद होते हैं।
समृद्धि केवल दीवाली पर नहीं, वर्ष भर कैसे रहे?
ग्रंथ और बड़े-बुज़ुर्ग एक ही उत्तर देते हैं: संध्या का दीप, शुक्रवार की पूजा, चालू हिसाब, एक निश्चित भाग का दान, गलत दिन उधार नहीं, और मुख्य द्वार साफ़ और रोशन। ऊपर के राशि-अनुसार उपाय आपके चन्द्र की राशि का ग्रह जोड़ते हैं; साइन-इन सदस्य को अपनी कुंडली से संकेत मिलते हैं।
मुहूर्त निकल जाए तो क्या पूजा हो सकती है?
हाँ। प्रदोष काल सबसे अच्छा समय है, वृषभ लग्न स्थिर; उसके बाद आधी रात का सिंह लग्न व्यापारी और रात्रि-जागरण करने वाले लेते हैं। दीवाली की किसी भी संध्या-घड़ी में श्रद्धा से की गई पूजा स्वीकार्य है; मुहूर्त वरीयता है, बाधा नहीं।
अगले साल की तारीखें और रोज़ का राशिफल ईमेल पर
रोज़ सुबह अपना राशिफल पाएँ
मुफ़्त, सुबह 5:30 बजे। अपनी राशि चुनें; कभी भी बन्द करें।
यह भी देखें: त्योहार 2026 · आज का पंचांग · मुहूर्त · पूजा विधियाँ · मुफ़्त कुंडली सामग्री सूची छापने का बटन ऊपर है