आज का पंचांग
आपके चुने शहर के लिए आज की तिथि, नक्षत्र, योग और करण उनके समाप्ति समय सहित, सूर्योदय-सूर्यास्त, राहुकाल, यमगण्ड, गुलिक काल, अभिजित मुहूर्त, चौघड़िया और 24 होरा — सन् 1900 से 2099 तक किसी भी तिथि के लिए। गणना स्विस एफ़ेमेरिस से लाहिरी अयनांश के साथ; सूर्योदय की रीति हर पेज पर लिखी है।
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दुनिया का कोई भी स्थान: समय क्षेत्र और सूर्योदय आपके चुने स्थान के अनुसार होंगे।
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ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया
पंचांग के बारे में
पंचांग क्या है?
पंचांग हिन्दू दिनदर्शिका है जिसके पाँच अंग हैं — तिथि (चंद्र दिवस), वार, नक्षत्र (चंद्रमा का नक्षत्र), योग (सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति) और करण (आधी तिथि)। इनके साथ सूर्योदय, राहुकाल और मुहूर्त से व्रत, त्योहार और शुभ कार्य का समय तय होता है।
पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?
हिन्दू दिन स्थानीय सूर्योदय से आरम्भ होता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि या नक्षत्र से दिन का नाम होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही क्षण दिल्ली और लंदन में अलग तिथि में पड़ सकता है — अपना शहर चुनें।
राहुकाल क्या होता है?
राहुकाल दिनमान (सूर्योदय से सूर्यास्त) का आठवाँ भाग है जो हर वार को निश्चित क्रम में आता है; इसमें नया शुभ कार्य आरम्भ नहीं किया जाता। यमगण्ड और गुलिक काल ऐसे ही दो और भाग हैं।
चौघड़िया क्या है?
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है — अमृत, शुभ, लाभ और चर शुभ हैं, उद्वेग, काल और रोग त्याज्य। गुजरात और राजस्थान में यात्रा या खरीदारी का समय इसी से चुना जाता है।
यह पंचांग कितना सटीक है?
हर गणना स्विस एफ़ेमेरिस से लाहिरी अयनांश के साथ होती है, और सूर्योदय सूर्य बिम्ब के ऊपरी किनारे से वायुमंडलीय अपवर्तन सहित लिया जाता है — यही द्रिक पंचांग की रीति है। द्रिक के छपे 2027 दिल्ली कैलेंडर से सूर्योदय-सूर्यास्त 356 में से 342 दिन मिनट तक मिलते हैं और हर व्रत-त्योहार की तिथि मिलती है।