साढ़े साती कैलकुलेटरशनि की साढ़े साती और ढैया कब से कब तक

साढ़े साती वह साढ़े सात वर्ष का समय है जिसमें शनि आपकी चंद्र राशि से पहले की राशि, चंद्र राशि और उसके बाद की राशि पार करता है। यह जाँच आपके जन्म विवरण से चंद्र राशि निकालती है और जीवन की हर साढ़े साती उसके चरणों की तिथियों सहित दिखाती है, साथ में शनि की ढैया भी।

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जन्म स्थान

तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं

  • 1

    आपकी चंद्र राशि जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से निकलती है।

  • 2

    प्रथम चरण (उदय): शनि चंद्र राशि से 12वीं राशि में। द्वितीय चरण (शिखर): शनि चंद्र राशि पर। तृतीय चरण (अस्त): शनि 2री राशि में। हर चरण लगभग ढाई वर्ष।

  • 3

    शनि का राशि परिवर्तन स्विस एफ़ेमेरिस और लाहिरी अयनांश से दिन तक गणना किया जाता है। वक्री होकर शनि जब पिछली राशि में लौटता है, वह समय अलग पंक्ति में दिखता है।

  • 4

    ढैया (लघु पनौती): शनि चंद्र राशि से चौथी (कंटक शनि) या आठवीं (अष्टम शनि) राशि में, हर एक लगभग ढाई वर्ष।

  • 5

    यहाँ जन्म समय का असर कम है: केवल चंद्र राशि ली जाती है, जो लगभग सवा दो दिन में बदलती है।

परंपरागत उपाय

  • शनिवार को हनुमान चालीसा, शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ।
  • शनिवार शाम पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक; काले तिल, सरसों का तेल या काला वस्त्र दान।
  • शनि मंत्र: ॐ शं शनैश्चराय नमः।
  • साढ़े साती सबके लिए अशुभ नहीं होती: जिनकी कुंडली में शनि योगकारक या बलवान हो, उन्हें यह स्थिर काम और फल भी देती है। इसे अपनी दशा के साथ पढ़ें।

शास्त्र प्रमाण

जिन सूत्रों पर यह जाँच आधारित है, ग्रंथ, अध्याय और श्लोक सहित।

सर्वेषु लग्नेष्वपि सत्सु चन्द्रलग्नं प्रधानं खलु गोचरेषु
— फलदीपिका (मंत्रेश्वर), Ch.26 Gocharaphala, sl. 1

कुंडली किसी भी लग्न से देखी जा सकती है, पर गोचर में चंद्र लग्न ही प्रधान है — इसी से साढ़े साती, ढैया और गोचर चंद्र राशि से गिने जाते हैं।

रोगाशौचक्रियाप्तिं धनसुतविहतिं ... अर्कसूनुः क्रमेण
— फलदीपिका (मंत्रेश्वर), Ch.26 Gocharaphala, sl. 22-23

चंद्र से गिनकर शनि का गोचर, भाव-भाव: बारहवें में व्यर्थ परिश्रम और शत्रुओं से हानि; पहले में रोग और सूतक-जनित अशौच; दूसरे में संतान कष्ट और धन हानि — यही साढ़े साती के तीन चरण हैं। चौथे (कंटक) में धन हानि और घर में कलह; आठवें (अष्टम) में सबसे कठिन समय — ये दो ढैया हैं।

सूर्यः षट्त्रिदशस्थितस्त्रिदशषट्सप्ताद्यगश्चन्द्रमाः
— फलदीपिका (मंत्रेश्वर), Ch.26 Gocharaphala, sl. 2

हर ग्रह चंद्र से केवल अपने कुछ भावों में ही शुभ फल देता है; शनि के लिए ये तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं। बाकी भाव, जिनमें साढ़े साती की राशियाँ भी हैं, कठिन माने जाते हैं।

शनि जिन नक्षत्रों में गोचरवश जा रहा है, उनको शत्रु समझता है अथवा मित्र
— गोचर विचार, Ch.4 Shani ki Sade Sati, the nakshatra rule

साढ़े साती का हर महीना कठिन नहीं होता: मित्र या अपने नक्षत्र से गुज़रते समय शनि हानि नहीं करता, सम ग्रह के नक्षत्र में फल मंद होता है, केवल शत्रु के नक्षत्र में कष्ट देता है।

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प्रश्न

साढ़े साती क्या है?

वह साढ़े सात वर्ष जिनमें शनि आपकी चंद्र राशि से 12वीं, चंद्र राशि और उससे 2री राशि से गुज़रता है। यह लगभग हर 30 वर्ष में आती है, इसलिए जीवन में दो या तीन बार।

साढ़े साती का कौन सा चरण सबसे कठिन होता है?

द्वितीय चरण, जब शनि स्वयं चंद्र राशि पर होता है, आमतौर पर सबसे भारी माना जाता है। अनुभव आपकी कुंडली में शनि के बल और चल रही दशा पर निर्भर है।

शनि की ढैया क्या है?

शनि का चंद्र राशि से चौथी (कंटक शनि) या आठवीं (अष्टम शनि) राशि में होना, हर बार लगभग ढाई वर्ष। इसे लघु पनौती भी कहते हैं।

साढ़े साती लग्न से देखी जाती है या चंद्र से?

चंद्र राशि से। इसलिए केवल आपकी चंद्र राशि चाहिए, और जन्म समय का असर कम है।

मेरी साढ़े साती में तीन से अधिक पंक्तियाँ क्यों हैं?

शनि हर वर्ष वक्री होता है। जब वह कुछ महीनों के लिए पिछली राशि में लौटता है, वह समय अलग पंक्ति में दिखता है, और साढ़े साती तभी खत्म होती है जब शनि तीसरी राशि को स्थायी रूप से छोड़ता है।