एकादशी 2048
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 11जन॰षट्तिला एकादशीशनिवार
- 26जन॰जया एकादशीरविवार
- 10फ़र॰विजया एकादशीसोमवार
- 25फ़र॰आमलकी एकादशीमंगलवार
- 10मार्चपापमोचनी एकादशीमंगलवार
- 26मार्चपद्मिनी एकादशीगुरुवार
- 9अप्रैलपरमा एकादशीगुरुवार
- 24अप्रैलकामदा एकादशीशुक्रवार
- 8मईवरुथिनी एकादशीशुक्रवार
- 24मईमोहिनी एकादशीरविवार
- 7जूनअपरा एकादशीरविवार
- 22जूननिर्जला एकादशीसोमवार
- 6जुल॰योगिनी एकादशीसोमवार
- 21जुल॰देवशयनी एकादशीमंगलवार
- 5अग॰कामिका एकादशीबुधवार
- 20अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीगुरुवार
- 4सित॰अजा एकादशीशुक्रवार
- 18सित॰परिवर्तिनी एकादशीशुक्रवार
- 3अक्टू॰इंदिरा एकादशीशनिवार
- 17अक्टू॰पापांकुशा एकादशीशनिवार
- 2नव॰रमा एकादशीसोमवार
- 16नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीसोमवार
- 1दिस॰उत्पन्ना एकादशीमंगलवार
- 15दिस॰मोक्षदा एकादशीमंगलवार
- 31दिस॰सफला एकादशीगुरुवार
प्रश्न-उत्तर
2048 में कितनी एकादशी हैं?
25 — पहली षट्तिला एकादशी (शनिवार, 11 जनवरी 2048), अंतिम सफला एकादशी (31 दिसंबर 2048)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।