प्रदोष व्रत 2048
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 13जन॰सोम प्रदोषसोमवार
- 28जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 11फ़र॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 27फ़र॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 12मार्चगुरु प्रदोषगुरुवार
- 27मार्चशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 10अप्रैलशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 26अप्रैलरवि प्रदोषरविवार
- 10मईरवि प्रदोषरविवार
- 25मईसोम प्रदोषसोमवार
- 8जूनसोम प्रदोषसोमवार
- 23जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 8जुल॰बुध प्रदोषबुधवार
- 23जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 6अग॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 21अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 5सित॰शनि प्रदोषशनिवार
- 19सित॰शनि प्रदोषशनिवार
- 5अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 19अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 3नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 17नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 3दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 17दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
प्रश्न-उत्तर
2048 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
24 — पहला सोम प्रदोष (सोमवार, 13 जनवरी 2048), अंतिम गुरु प्रदोष (17 दिसंबर 2048)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।