एकादशी 2050
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 3जन॰पौष पुत्रदा एकादशीसोमवार
- 19जन॰षट्तिला एकादशीबुधवार
- 2फ़र॰जया एकादशीबुधवार
- 18फ़र॰विजया एकादशीशुक्रवार
- 4मार्चआमलकी एकादशीशुक्रवार
- 19मार्चपापमोचनी एकादशीशनिवार
- 2अप्रैलकामदा एकादशीशनिवार
- 17अप्रैलवरुथिनी एकादशीरविवार
- 2मईमोहिनी एकादशीसोमवार
- 17मईअपरा एकादशीमंगलवार
- 1जूननिर्जला एकादशीबुधवार
- 15जूनयोगिनी एकादशीबुधवार
- 1जुल॰देवशयनी एकादशीशुक्रवार
- 14जुल॰कामिका एकादशीगुरुवार
- 30जुल॰श्रावण पुत्रदा एकादशीशनिवार
- 13अग॰अजा एकादशीशनिवार
- 28अग॰पद्मिनी एकादशीरविवार
- 11सित॰परमा एकादशीरविवार
- 27सित॰परिवर्तिनी एकादशीमंगलवार
- 11अक्टू॰इंदिरा एकादशीमंगलवार
- 26अक्टू॰पापांकुशा एकादशीबुधवार
- 10नव॰रमा एकादशीगुरुवार
- 24नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीगुरुवार
- 10दिस॰उत्पन्ना एकादशीशनिवार
- 24दिस॰मोक्षदा एकादशीशनिवार
प्रश्न-उत्तर
2050 में कितनी एकादशी हैं?
25 — पहली पौष पुत्रदा एकादशी (सोमवार, 3 जनवरी 2050), अंतिम मोक्षदा एकादशी (24 दिसंबर 2050)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।