प्रदोष व्रत 2050
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 5जन॰बुध प्रदोषबुधवार
- 20जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 4फ़र॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 19फ़र॰शनि प्रदोषशनिवार
- 5मार्चशनि प्रदोषशनिवार
- 20मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 4अप्रैलसोम प्रदोषसोमवार
- 19अप्रैलभौम प्रदोषमंगलवार
- 4मईबुध प्रदोषबुधवार
- 18मईबुध प्रदोषबुधवार
- 2जूनगुरु प्रदोषगुरुवार
- 16जूनगुरु प्रदोषगुरुवार
- 2जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 16जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 31जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 14अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 30अग॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 13सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 28सित॰बुध प्रदोषबुधवार
- 13अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 27अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 11नव॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 26नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 11दिस॰रवि प्रदोषरविवार
- 25दिस॰रवि प्रदोषरविवार
प्रश्न-उत्तर
2050 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला बुध प्रदोष (बुधवार, 5 जनवरी 2050), अंतिम रवि प्रदोष (25 दिसंबर 2050)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।