प्रदोष व्रत 2043
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 8जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 22जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 7फ़र॰शनि प्रदोषशनिवार
- 21फ़र॰शनि प्रदोषशनिवार
- 9मार्चसोम प्रदोषसोमवार
- 22मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 7अप्रैलभौम प्रदोषमंगलवार
- 21अप्रैलभौम प्रदोषमंगलवार
- 6मईबुध प्रदोषबुधवार
- 21मईगुरु प्रदोषगुरुवार
- 5जूनशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 19जूनशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 4जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 19जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 2अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 18अग॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 1सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 16सित॰बुध प्रदोषबुधवार
- 30सित॰बुध प्रदोषबुधवार
- 16अक्टू॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 30अक्टू॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 14नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 28नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 14दिस॰सोम प्रदोषसोमवार
- 28दिस॰सोम प्रदोषसोमवार
प्रश्न-उत्तर
2043 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला गुरु प्रदोष (गुरुवार, 8 जनवरी 2043), अंतिम सोम प्रदोष (28 दिसंबर 2043)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।