एकादशी 2043
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 7जन॰सफला एकादशीबुधवार
- 21जन॰पौष पुत्रदा एकादशीबुधवार
- 5फ़र॰षट्तिला एकादशीगुरुवार
- 19फ़र॰जया एकादशीगुरुवार
- 7मार्चविजया एकादशीशनिवार
- 21मार्चआमलकी एकादशीशनिवार
- 6अप्रैलपापमोचनी एकादशीसोमवार
- 19अप्रैलकामदा एकादशीरविवार
- 5मईवरुथिनी एकादशीमंगलवार
- 19मईमोहिनी एकादशीमंगलवार
- 3जूनअपरा एकादशीबुधवार
- 18जूननिर्जला एकादशीगुरुवार
- 3जुल॰योगिनी एकादशीशुक्रवार
- 17जुल॰देवशयनी एकादशीशुक्रवार
- 1अग॰कामिका एकादशीशनिवार
- 16अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीरविवार
- 30अग॰अजा एकादशीरविवार
- 15सित॰परिवर्तिनी एकादशीमंगलवार
- 29सित॰इंदिरा एकादशीमंगलवार
- 14अक्टू॰पापांकुशा एकादशीबुधवार
- 28अक्टू॰रमा एकादशीबुधवार
- 13नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीशुक्रवार
- 27नव॰उत्पन्ना एकादशीशुक्रवार
- 12दिस॰मोक्षदा एकादशीशनिवार
- 26दिस॰सफला एकादशीशनिवार
प्रश्न-उत्तर
2043 में कितनी एकादशी हैं?
25 — पहली सफला एकादशी (बुधवार, 7 जनवरी 2043), अंतिम सफला एकादशी (26 दिसंबर 2043)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।