प्रदोष व्रत 2042
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 3जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 19जन॰रवि प्रदोषरविवार
- 2फ़र॰रवि प्रदोषरविवार
- 18फ़र॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 4मार्चभौम प्रदोषमंगलवार
- 19मार्चबुध प्रदोषबुधवार
- 2अप्रैलबुध प्रदोषबुधवार
- 17अप्रैलगुरु प्रदोषगुरुवार
- 2मईशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 17मईशनि प्रदोषशनिवार
- 1जूनरवि प्रदोषरविवार
- 15जूनरवि प्रदोषरविवार
- 30जूनसोम प्रदोषसोमवार
- 14जुल॰सोम प्रदोषसोमवार
- 30जुल॰बुध प्रदोषबुधवार
- 13अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 28अग॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 11सित॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 27सित॰शनि प्रदोषशनिवार
- 11अक्टू॰शनि प्रदोषशनिवार
- 26अक्टू॰रवि प्रदोषरविवार
- 10नव॰सोम प्रदोषसोमवार
- 25नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 9दिस॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 24दिस॰बुध प्रदोषबुधवार
प्रश्न-उत्तर
2042 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला शुक्र प्रदोष (शुक्रवार, 3 जनवरी 2042), अंतिम बुध प्रदोष (24 दिसंबर 2042)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।