प्रदोष व्रत 2041
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 14जन॰सोम प्रदोषसोमवार
- 30जन॰बुध प्रदोषबुधवार
- 13फ़र॰बुध प्रदोषबुधवार
- 28फ़र॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 15मार्चशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 29मार्चशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 13अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 28अप्रैलरवि प्रदोषरविवार
- 13मईसोम प्रदोषसोमवार
- 27मईसोम प्रदोषसोमवार
- 11जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 25जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 11जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 25जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 9अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 23अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 8सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 22सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 7अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 22अक्टू॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 5नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 21नव॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 5दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 20दिस॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
प्रश्न-उत्तर
2041 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
24 — पहला सोम प्रदोष (सोमवार, 14 जनवरी 2041), अंतिम शुक्र प्रदोष (20 दिसंबर 2041)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।