एकादशी 2041
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 12जन॰पौष पुत्रदा एकादशीशनिवार
- 28जन॰षट्तिला एकादशीसोमवार
- 11फ़र॰जया एकादशीसोमवार
- 27फ़र॰विजया एकादशीबुधवार
- 13मार्चआमलकी एकादशीबुधवार
- 28मार्चपापमोचनी एकादशीगुरुवार
- 12अप्रैलकामदा एकादशीशुक्रवार
- 26अप्रैलवरुथिनी एकादशीशुक्रवार
- 11मईमोहिनी एकादशीशनिवार
- 26मईअपरा एकादशीरविवार
- 10जूननिर्जला एकादशीसोमवार
- 24जूनयोगिनी एकादशीसोमवार
- 10जुल॰देवशयनी एकादशीबुधवार
- 23जुल॰कामिका एकादशीमंगलवार
- 8अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीगुरुवार
- 22अग॰अजा एकादशीगुरुवार
- 6सित॰परिवर्तिनी एकादशीशुक्रवार
- 20सित॰इंदिरा एकादशीशुक्रवार
- 6अक्टू॰पापांकुशा एकादशीरविवार
- 20अक्टू॰रमा एकादशीरविवार
- 4नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीसोमवार
- 19नव॰उत्पन्ना एकादशीमंगलवार
- 3दिस॰मोक्षदा एकादशीमंगलवार
- 19दिस॰सफला एकादशीगुरुवार
प्रश्न-उत्तर
2041 में कितनी एकादशी हैं?
24 — पहली पौष पुत्रदा एकादशी (शनिवार, 12 जनवरी 2041), अंतिम सफला एकादशी (19 दिसंबर 2041)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।