प्रदोष व्रत 2005
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 8जन॰शनि प्रदोषशनिवार
- 22जन॰शनि प्रदोषशनिवार
- 6फ़र॰रवि प्रदोषरविवार
- 21फ़र॰सोम प्रदोषसोमवार
- 8मार्चभौम प्रदोषमंगलवार
- 23मार्चबुध प्रदोषबुधवार
- 6अप्रैलबुध प्रदोषबुधवार
- 21अप्रैलगुरु प्रदोषगुरुवार
- 5मईगुरु प्रदोषगुरुवार
- 21मईशनि प्रदोषशनिवार
- 4जूनशनि प्रदोषशनिवार
- 19जूनरवि प्रदोषरविवार
- 3जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 19जुल॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 2अग॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 17अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 31अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 15सित॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 30सित॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 15अक्टू॰शनि प्रदोषशनिवार
- 30अक्टू॰रवि प्रदोषरविवार
- 13नव॰रवि प्रदोषरविवार
- 29नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 13दिस॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 28दिस॰बुध प्रदोषबुधवार
प्रश्न-उत्तर
2005 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला शनि प्रदोष (शनिवार, 8 जनवरी 2005), अंतिम बुध प्रदोष (28 दिसंबर 2005)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।