प्रदोष व्रत 2006
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 11जन॰बुध प्रदोषबुधवार
- 27जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 10फ़र॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 25फ़र॰शनि प्रदोषशनिवार
- 12मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 27मार्चसोम प्रदोषसोमवार
- 10अप्रैलसोम प्रदोषसोमवार
- 25अप्रैलभौम प्रदोषमंगलवार
- 10मईबुध प्रदोषबुधवार
- 24मईबुध प्रदोषबुधवार
- 9जूनशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 23जूनशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 8जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 22जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 7अग॰सोम प्रदोषसोमवार
- 20अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 5सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 19सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 4अक्टू॰बुध प्रदोषबुधवार
- 19अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 3नव॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 18नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 2दिस॰शनि प्रदोषशनिवार
- 18दिस॰सोम प्रदोषसोमवार
प्रश्न-उत्तर
2006 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
24 — पहला बुध प्रदोष (बुधवार, 11 जनवरी 2006), अंतिम सोम प्रदोष (18 दिसंबर 2006)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।