प्रदोष व्रत 2007
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 1जन॰सोम प्रदोषसोमवार
- 16जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 30जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 15फ़र॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 1मार्चगुरु प्रदोषगुरुवार
- 16मार्चशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 30मार्चशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 15अप्रैलरवि प्रदोषरविवार
- 29अप्रैलरवि प्रदोषरविवार
- 14मईसोम प्रदोषसोमवार
- 29मईभौम प्रदोषमंगलवार
- 12जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 27जूनबुध प्रदोषबुधवार
- 12जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 27जुल॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 10अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 26अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 8सित॰शनि प्रदोषशनिवार
- 24सित॰सोम प्रदोषसोमवार
- 8अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 24अक्टू॰बुध प्रदोषबुधवार
- 7नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 22नव॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 6दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 21दिस॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
प्रश्न-उत्तर
2007 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला सोम प्रदोष (सोमवार, 1 जनवरी 2007), अंतिम शुक्र प्रदोष (21 दिसंबर 2007)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।