प्रदोष व्रत 2008
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 5जन॰शनि प्रदोषशनिवार
- 20जन॰रवि प्रदोषरविवार
- 4फ़र॰सोम प्रदोषसोमवार
- 18फ़र॰सोम प्रदोषसोमवार
- 5मार्चबुध प्रदोषबुधवार
- 19मार्चबुध प्रदोषबुधवार
- 3अप्रैलगुरु प्रदोषगुरुवार
- 17अप्रैलगुरु प्रदोषगुरुवार
- 3मईशनि प्रदोषशनिवार
- 17मईशनि प्रदोषशनिवार
- 1जूनरवि प्रदोषरविवार
- 15जूनरवि प्रदोषरविवार
- 30जूनसोम प्रदोषसोमवार
- 15जुल॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 30जुल॰बुध प्रदोषबुधवार
- 14अग॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 28अग॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 12सित॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 26सित॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 12अक्टू॰रवि प्रदोषरविवार
- 26अक्टू॰रवि प्रदोषरविवार
- 11नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 24नव॰सोम प्रदोषसोमवार
- 10दिस॰बुध प्रदोषबुधवार
- 24दिस॰बुध प्रदोषबुधवार
प्रश्न-उत्तर
2008 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला शनि प्रदोष (शनिवार, 5 जनवरी 2008), अंतिम बुध प्रदोष (24 दिसंबर 2008)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।