प्रदोष व्रत 2009
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 8जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 23जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 7फ़र॰शनि प्रदोषशनिवार
- 22फ़र॰रवि प्रदोषरविवार
- 8मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 24मार्चभौम प्रदोषमंगलवार
- 7अप्रैलभौम प्रदोषमंगलवार
- 22अप्रैलबुध प्रदोषबुधवार
- 6मईबुध प्रदोषबुधवार
- 22मईशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 4जूनगुरु प्रदोषगुरुवार
- 20जूनशनि प्रदोषशनिवार
- 4जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 19जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 3अग॰सोम प्रदोषसोमवार
- 18अग॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 1सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 16सित॰बुध प्रदोषबुधवार
- 1अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 15अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 31अक्टू॰शनि प्रदोषशनिवार
- 14नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 29नव॰रवि प्रदोषरविवार
- 13दिस॰रवि प्रदोषरविवार
- 29दिस॰भौम प्रदोषमंगलवार
प्रश्न-उत्तर
2009 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला गुरु प्रदोष (गुरुवार, 8 जनवरी 2009), अंतिम भौम प्रदोष (29 दिसंबर 2009)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।