प्रदोष व्रत 2004
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 4जन॰रवि प्रदोषरविवार
- 19जन॰सोम प्रदोषसोमवार
- 3फ़र॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 18फ़र॰बुध प्रदोषबुधवार
- 4मार्चगुरु प्रदोषगुरुवार
- 18मार्चगुरु प्रदोषगुरुवार
- 3अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 16अप्रैलशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 2मईरवि प्रदोषरविवार
- 16मईरवि प्रदोषरविवार
- 31मईसोम प्रदोषसोमवार
- 14जूनसोम प्रदोषसोमवार
- 30जूनबुध प्रदोषबुधवार
- 14जुल॰बुध प्रदोषबुधवार
- 29जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 13अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 27अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 11सित॰शनि प्रदोषशनिवार
- 26सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 11अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 25अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 10नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 24नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 9दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 23दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
प्रश्न-उत्तर
2004 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला रवि प्रदोष (रविवार, 4 जनवरी 2004), अंतिम गुरु प्रदोष (23 दिसंबर 2004)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।