राहुकाल · वाराणसी

गुरुवार, 4 जुलाई 203005:1218:53

राहु काल

1 घं. 43 मि.
13:45 –15:28

दिन का राहु भाग: नया कार्य आरंभ न करें।

यमगंड

1 घं. 43 मि.
05:12 –06:55

दिन का यम भाग: यात्रा और नए आरंभ से बचें।

गुलिक काल

1 घं. 43 मि.
08:37 –10:20

दिन का गुलिक भाग: शुभ आरंभ से बचें।

दिनमान के आठ भाग

राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल प्रत्येक दिनमान का आठवाँ भाग हैं, जो हर वार के लिए निश्चित खंड में आते हैं।

1
05:12
यमगंड
2
06:55
—
3
08:37
गुलिक काल
4
10:20
—
5
12:02
—
6
13:45
राहु काल
7
15:28
—
8
17:10
—

आज इनसे भी बचें

  • दुर्मुहूर्तवार का दुर्मुहूर्त: शुभ कार्य से बचें।09:46 –10:40
  • दुर्मुहूर्तवार का दुर्मुहूर्त: शुभ कार्य से बचें।15:14 –16:09
  • वर्ज्यनक्षत्र का विष भाग: महत्वपूर्ण कार्य से बचें।06:37 –08:18
  • गंड मूलजल और अग्नि नक्षत्रों की संधि: जन्म और आरंभ में सावधानी।05:12 –18:25
  • गंड मूलजल और अग्नि नक्षत्रों की संधि: जन्म और आरंभ में सावधानी।18:25 –05:13, 5 जुल॰
  • भद्राविष्टि करण: शुभ संस्कार न करें।19:05 –05:13, 5 जुल॰

वाराणसी के समय (UTC+5:30)। हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। सूर्योदय और सूर्यास्त सूर्य के ऊपरी किनारे और अपवर्तन से लिए गए हैं, जैसे दृक् पंचांग में; हर किनारा निकटतम मिनट तक पूर्णांकित।

राहुकाल

राहुकाल दिनमान का वह आठवाँ भाग है जिसका स्वामी राहु है और जो हर वार के लिए निश्चित है; इसमें कोई नया कार्य आरंभ नहीं किया जाता। यमगंड और गुलिक काल यम और गुलिक के भाग हैं। दुर्मुहूर्त और वर्ज्य दिन के अन्य अशुभ समय हैं।

राहुकाल — प्रश्न और उत्तर

राहुकाल क्या है?

राहुकाल दिनमान का वह आठवाँ भाग है जिसका स्वामी राहु है और जो हर वार के लिए निश्चित है; इसमें कोई नया कार्य आरंभ नहीं किया जाता। यमगंड और गुलिक काल यम और गुलिक के भाग हैं। दुर्मुहूर्त और वर्ज्य दिन के अन्य अशुभ समय हैं।

वाराणसी में 4 जुलाई 2030 का राहुकाल क्या है?

राहुकाल 13:45–15:28, यमगण्ड 05:12–06:55, गुलिक काल 08:37–10:20; साथ में दुर्मुहूर्त और वर्ज्य।

राहुकाल — अन्य शहर