राहुकाल · तिरुपति

शनिवार, 4 अगस्त 202905:5818:39

राहु काल

1 घं. 35 मि.
09:08 –10:43

दिन का राहु भाग: नया कार्य आरंभ न करें।

यमगंड

1 घं. 35 मि.
13:54 –15:29

दिन का यम भाग: यात्रा और नए आरंभ से बचें।

गुलिक काल

1 घं. 35 मि.
05:58 –07:33

दिन का गुलिक भाग: शुभ आरंभ से बचें।

दिनमान के आठ भाग

राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल प्रत्येक दिनमान का आठवाँ भाग हैं, जो हर वार के लिए निश्चित खंड में आते हैं।

1
05:58
गुलिक काल
2
07:33
—
3
09:08
राहु काल
4
10:43
—
5
12:18
—
6
13:54
यमगंड
7
15:29
—
8
17:04
—

आज इनसे भी बचें

  • दुर्मुहूर्तवार का दुर्मुहूर्त: शुभ कार्य से बचें।05:58 –06:48
  • दुर्मुहूर्तवार का दुर्मुहूर्त: शुभ कार्य से बचें।06:48 –07:39
  • भद्राविष्टि करण: शुभ संस्कार न करें।20:51 –05:58, 5 अग॰

तिरुपति के समय (UTC+5:30)। हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। सूर्योदय और सूर्यास्त सूर्य के ऊपरी किनारे और अपवर्तन से लिए गए हैं, जैसे दृक् पंचांग में; हर किनारा निकटतम मिनट तक पूर्णांकित।

राहुकाल

राहुकाल दिनमान का वह आठवाँ भाग है जिसका स्वामी राहु है और जो हर वार के लिए निश्चित है; इसमें कोई नया कार्य आरंभ नहीं किया जाता। यमगंड और गुलिक काल यम और गुलिक के भाग हैं। दुर्मुहूर्त और वर्ज्य दिन के अन्य अशुभ समय हैं।

राहुकाल — प्रश्न और उत्तर

राहुकाल क्या है?

राहुकाल दिनमान का वह आठवाँ भाग है जिसका स्वामी राहु है और जो हर वार के लिए निश्चित है; इसमें कोई नया कार्य आरंभ नहीं किया जाता। यमगंड और गुलिक काल यम और गुलिक के भाग हैं। दुर्मुहूर्त और वर्ज्य दिन के अन्य अशुभ समय हैं।

तिरुपति में 4 अगस्त 2029 का राहुकाल क्या है?

राहुकाल 09:08–10:43, यमगण्ड 13:54–15:29, गुलिक काल 05:58–07:33; साथ में दुर्मुहूर्त और वर्ज्य।

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