एकादशी 2046
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 3जन॰सफला एकादशीबुधवार
- 18जन॰पौष पुत्रदा एकादशीगुरुवार
- 1फ़र॰षट्तिला एकादशीगुरुवार
- 17फ़र॰जया एकादशीशनिवार
- 3मार्चविजया एकादशीशनिवार
- 18मार्चआमलकी एकादशीरविवार
- 2अप्रैलपापमोचनी एकादशीसोमवार
- 17अप्रैलकामदा एकादशीमंगलवार
- 1मईवरुथिनी एकादशीमंगलवार
- 16मईमोहिनी एकादशीबुधवार
- 31मईअपरा एकादशीगुरुवार
- 14जूननिर्जला एकादशीगुरुवार
- 30जूनयोगिनी एकादशीशनिवार
- 14जुल॰देवशयनी एकादशीशनिवार
- 29जुल॰कामिका एकादशीरविवार
- 12अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीरविवार
- 28अग॰अजा एकादशीमंगलवार
- 10सित॰परिवर्तिनी एकादशीसोमवार
- 26सित॰इंदिरा एकादशीबुधवार
- 10अक्टू॰पापांकुशा एकादशीबुधवार
- 25अक्टू॰रमा एकादशीगुरुवार
- 9नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीशुक्रवार
- 24नव॰उत्पन्ना एकादशीशनिवार
- 9दिस॰मोक्षदा एकादशीरविवार
- 23दिस॰सफला एकादशीरविवार
प्रश्न-उत्तर
2046 में कितनी एकादशी हैं?
25 — पहली सफला एकादशी (बुधवार, 3 जनवरी 2046), अंतिम सफला एकादशी (23 दिसंबर 2046)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।