एकादशी 2045
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 13जन॰षट्तिला एकादशीशुक्रवार
- 29जन॰जया एकादशीरविवार
- 12फ़र॰विजया एकादशीरविवार
- 27फ़र॰आमलकी एकादशीसोमवार
- 14मार्चपापमोचनी एकादशीमंगलवार
- 29मार्चकामदा एकादशीबुधवार
- 13अप्रैलवरुथिनी एकादशीगुरुवार
- 27अप्रैलमोहिनी एकादशीगुरुवार
- 12मईअपरा एकादशीशुक्रवार
- 26मईपद्मिनी एकादशीशुक्रवार
- 11जूनपरमा एकादशीरविवार
- 25जूननिर्जला एकादशीरविवार
- 10जुल॰योगिनी एकादशीसोमवार
- 24जुल॰देवशयनी एकादशीसोमवार
- 9अग॰कामिका एकादशीबुधवार
- 23अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीबुधवार
- 7सित॰अजा एकादशीगुरुवार
- 21सित॰परिवर्तिनी एकादशीगुरुवार
- 6अक्टू॰इंदिरा एकादशीशुक्रवार
- 21अक्टू॰पापांकुशा एकादशीशनिवार
- 5नव॰रमा एकादशीरविवार
- 20नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीसोमवार
- 4दिस॰उत्पन्ना एकादशीसोमवार
- 20दिस॰मोक्षदा एकादशीबुधवार
प्रश्न-उत्तर
2045 में कितनी एकादशी हैं?
24 — पहली षट्तिला एकादशी (शुक्रवार, 13 जनवरी 2045), अंतिम मोक्षदा एकादशी (20 दिसंबर 2045)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।