प्रदोष व्रत 2033
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 12जन॰बुध प्रदोषबुधवार
- 28जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 11फ़र॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 27फ़र॰रवि प्रदोषरविवार
- 13मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 28मार्चसोम प्रदोषसोमवार
- 11अप्रैलसोम प्रदोषसोमवार
- 26अप्रैलभौम प्रदोषमंगलवार
- 11मईबुध प्रदोषबुधवार
- 26मईगुरु प्रदोषगुरुवार
- 10जूनशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 24जूनशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 9जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 23जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 8अग॰सोम प्रदोषसोमवार
- 22अग॰सोम प्रदोषसोमवार
- 6सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 20सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 6अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 20अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 4नव॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 19नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 4दिस॰रवि प्रदोषरविवार
- 19दिस॰सोम प्रदोषसोमवार
प्रश्न-उत्तर
2033 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
24 — पहला बुध प्रदोष (बुधवार, 12 जनवरी 2033), अंतिम सोम प्रदोष (19 दिसंबर 2033)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।