प्रदोष व्रत 2034
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 2जन॰सोम प्रदोषसोमवार
- 17जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 31जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 16फ़र॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 2मार्चगुरु प्रदोषगुरुवार
- 18मार्चशनि प्रदोषशनिवार
- 1अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 16अप्रैलरवि प्रदोषरविवार
- 30अप्रैलरवि प्रदोषरविवार
- 15मईसोम प्रदोषसोमवार
- 30मईभौम प्रदोषमंगलवार
- 14जूनबुध प्रदोषबुधवार
- 28जूनबुध प्रदोषबुधवार
- 13जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 28जुल॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 11अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 27अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 10सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 25सित॰सोम प्रदोषसोमवार
- 9अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 25अक्टू॰बुध प्रदोषबुधवार
- 8नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 23नव॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 8दिस॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 23दिस॰शनि प्रदोषशनिवार
प्रश्न-उत्तर
2034 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला सोम प्रदोष (सोमवार, 2 जनवरी 2034), अंतिम शनि प्रदोष (23 दिसंबर 2034)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।