प्रदोष व्रत 2032
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 10जन॰शनि प्रदोषशनिवार
- 24जन॰शनि प्रदोषशनिवार
- 9फ़र॰सोम प्रदोषसोमवार
- 23फ़र॰सोम प्रदोषसोमवार
- 9मार्चभौम प्रदोषमंगलवार
- 24मार्चबुध प्रदोषबुधवार
- 7अप्रैलबुध प्रदोषबुधवार
- 22अप्रैलगुरु प्रदोषगुरुवार
- 7मईशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 22मईशनि प्रदोषशनिवार
- 5जूनशनि प्रदोषशनिवार
- 21जूनसोम प्रदोषसोमवार
- 4जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 20जुल॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 3अग॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 18अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 2सित॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 17सित॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 1अक्टू॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 16अक्टू॰शनि प्रदोषशनिवार
- 31अक्टू॰रवि प्रदोषरविवार
- 14नव॰रवि प्रदोषरविवार
- 30नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 14दिस॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 30दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
प्रश्न-उत्तर
2032 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला शनि प्रदोष (शनिवार, 10 जनवरी 2032), अंतिम गुरु प्रदोष (30 दिसंबर 2032)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।