प्रदोष व्रत 2031
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 5जन॰रवि प्रदोषरविवार
- 20जन॰सोम प्रदोषसोमवार
- 4फ़र॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 19फ़र॰बुध प्रदोषबुधवार
- 6मार्चगुरु प्रदोषगुरुवार
- 20मार्चगुरु प्रदोषगुरुवार
- 5अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 19अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 4मईरवि प्रदोषरविवार
- 18मईरवि प्रदोषरविवार
- 3जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 17जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 2जुल॰बुध प्रदोषबुधवार
- 16जुल॰बुध प्रदोषबुधवार
- 31जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 15अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 30अग॰शनि प्रदोषशनिवार
- 14सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 28सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 13अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 27अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 12नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 26नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 12दिस॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 25दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
प्रश्न-उत्तर
2031 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला रवि प्रदोष (रविवार, 5 जनवरी 2031), अंतिम गुरु प्रदोष (25 दिसंबर 2031)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।