प्रदोष व्रत 2030

प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।

प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें

प्रश्न-उत्तर

2030 में कितने प्रदोष व्रत हैं?

25 — पहला भौम प्रदोष (मंगलवार, 1 जनवरी 2030), अंतिम रवि प्रदोष (22 दिसंबर 2030)।

प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?

हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।