प्रदोष व्रत 2030
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 1जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 17जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 31जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 15फ़र॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 1मार्चशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 17मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 31मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 15अप्रैलसोम प्रदोषसोमवार
- 29अप्रैलसोम प्रदोषसोमवार
- 15मईबुध प्रदोषबुधवार
- 29मईबुध प्रदोषबुधवार
- 13जूनगुरु प्रदोषगुरुवार
- 28जूनशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 12जुल॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 27जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 11अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 26अग॰सोम प्रदोषसोमवार
- 9सित॰सोम प्रदोषसोमवार
- 24सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 8अक्टू॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 24अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 7नव॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 23नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 7दिस॰शनि प्रदोषशनिवार
- 22दिस॰रवि प्रदोषरविवार
प्रश्न-उत्तर
2030 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला भौम प्रदोष (मंगलवार, 1 जनवरी 2030), अंतिम रवि प्रदोष (22 दिसंबर 2030)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।