प्रदोष व्रत 2017
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 10जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 25जन॰बुध प्रदोषबुधवार
- 8फ़र॰बुध प्रदोषबुधवार
- 24फ़र॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 10मार्चशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 25मार्चशनि प्रदोषशनिवार
- 8अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 24अप्रैलसोम प्रदोषसोमवार
- 8मईसोम प्रदोषसोमवार
- 23मईभौम प्रदोषमंगलवार
- 6जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 21जूनबुध प्रदोषबुधवार
- 6जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 21जुल॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 4अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 19अग॰शनि प्रदोषशनिवार
- 3सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 17सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 3अक्टू॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 17अक्टू॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 1नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 15नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 1दिस॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 15दिस॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 30दिस॰शनि प्रदोषशनिवार
प्रश्न-उत्तर
2017 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला भौम प्रदोष (मंगलवार, 10 जनवरी 2017), अंतिम शनि प्रदोष (30 दिसंबर 2017)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।