प्रदोष व्रत 2016
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 7जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 21जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 6फ़र॰शनि प्रदोषशनिवार
- 20फ़र॰शनि प्रदोषशनिवार
- 6मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 20मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 5अप्रैलभौम प्रदोषमंगलवार
- 19अप्रैलभौम प्रदोषमंगलवार
- 4मईबुध प्रदोषबुधवार
- 19मईगुरु प्रदोषगुरुवार
- 2जूनगुरु प्रदोषगुरुवार
- 17जूनशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 2जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 17जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 31जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 15अग॰सोम प्रदोषसोमवार
- 29अग॰सोम प्रदोषसोमवार
- 14सित॰बुध प्रदोषबुधवार
- 28सित॰बुध प्रदोषबुधवार
- 13अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 27अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 12नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 26नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 11दिस॰रवि प्रदोषरविवार
- 26दिस॰सोम प्रदोषसोमवार
प्रश्न-उत्तर
2016 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला गुरु प्रदोष (गुरुवार, 7 जनवरी 2016), अंतिम सोम प्रदोष (26 दिसंबर 2016)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।