प्रदोष व्रत 2013
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 9जन॰बुध प्रदोषबुधवार
- 24जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 8फ़र॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 23फ़र॰शनि प्रदोषशनिवार
- 9मार्चशनि प्रदोषशनिवार
- 24मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 7अप्रैलरवि प्रदोषरविवार
- 23अप्रैलभौम प्रदोषमंगलवार
- 7मईभौम प्रदोषमंगलवार
- 22मईबुध प्रदोषबुधवार
- 5जूनबुध प्रदोषबुधवार
- 21जूनशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 5जुल॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 20जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 4अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 18अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 2सित॰सोम प्रदोषसोमवार
- 17सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 2अक्टू॰बुध प्रदोषबुधवार
- 16अक्टू॰बुध प्रदोषबुधवार
- 1नव॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 15नव॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 30नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 14दिस॰शनि प्रदोषशनिवार
- 30दिस॰सोम प्रदोषसोमवार
प्रश्न-उत्तर
2013 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला बुध प्रदोष (बुधवार, 9 जनवरी 2013), अंतिम सोम प्रदोष (30 दिसंबर 2013)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।