प्रदोष व्रत 2014
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 13जन॰सोम प्रदोषसोमवार
- 28जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 12फ़र॰बुध प्रदोषबुधवार
- 27फ़र॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 13मार्चगुरु प्रदोषगुरुवार
- 28मार्चशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 12अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 26अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 12मईसोम प्रदोषसोमवार
- 26मईसोम प्रदोषसोमवार
- 10जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 24जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 10जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 24जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 8अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 22अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 6सित॰शनि प्रदोषशनिवार
- 21सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 6अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 21अक्टू॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 4नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 19नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 4दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 19दिस॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
प्रश्न-उत्तर
2014 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
24 — पहला सोम प्रदोष (सोमवार, 13 जनवरी 2014), अंतिम शुक्र प्रदोष (19 दिसंबर 2014)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।