प्रदोष व्रत 2012
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 6जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 20जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 5फ़र॰रवि प्रदोषरविवार
- 19फ़र॰रवि प्रदोषरविवार
- 6मार्चभौम प्रदोषमंगलवार
- 19मार्चसोम प्रदोषसोमवार
- 4अप्रैलबुध प्रदोषबुधवार
- 18अप्रैलबुध प्रदोषबुधवार
- 3मईगुरु प्रदोषगुरुवार
- 18मईशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 2जूनशनि प्रदोषशनिवार
- 16जूनशनि प्रदोषशनिवार
- 1जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 16जुल॰सोम प्रदोषसोमवार
- 30जुल॰सोम प्रदोषसोमवार
- 15अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 29अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 13सित॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 27सित॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 13अक्टू॰शनि प्रदोषशनिवार
- 27अक्टू॰शनि प्रदोषशनिवार
- 11नव॰रवि प्रदोषरविवार
- 25नव॰रवि प्रदोषरविवार
- 11दिस॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 25दिस॰भौम प्रदोषमंगलवार
प्रश्न-उत्तर
2012 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला शुक्र प्रदोष (शुक्रवार, 6 जनवरी 2012), अंतिम भौम प्रदोष (25 दिसंबर 2012)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।