प्रदोष व्रत 2011
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 1जन॰शनि प्रदोषशनिवार
- 17जन॰सोम प्रदोषसोमवार
- 31जन॰सोम प्रदोषसोमवार
- 16फ़र॰बुध प्रदोषबुधवार
- 2मार्चबुध प्रदोषबुधवार
- 17मार्चगुरु प्रदोषगुरुवार
- 31मार्चगुरु प्रदोषगुरुवार
- 15अप्रैलशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 30अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 15मईरवि प्रदोषरविवार
- 30मईसोम प्रदोषसोमवार
- 13जूनसोम प्रदोषसोमवार
- 28जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 12जुल॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 28जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 11अग॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 26अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 9सित॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 25सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 9अक्टू॰रवि प्रदोषरविवार
- 24अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 8नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 23नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 7दिस॰बुध प्रदोषबुधवार
- 22दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
प्रश्न-उत्तर
2011 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला शनि प्रदोष (शनिवार, 1 जनवरी 2011), अंतिम गुरु प्रदोष (22 दिसंबर 2011)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।