एकादशी 2011
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 16जन॰पौष पुत्रदा एकादशीरविवार
- 29जन॰षट्तिला एकादशीशनिवार
- 14फ़र॰जया एकादशीसोमवार
- 28फ़र॰विजया एकादशीसोमवार
- 16मार्चआमलकी एकादशीबुधवार
- 30मार्चपापमोचनी एकादशीबुधवार
- 14अप्रैलकामदा एकादशीगुरुवार
- 28अप्रैलवरुथिनी एकादशीगुरुवार
- 13मईमोहिनी एकादशीशुक्रवार
- 28मईअपरा एकादशीशनिवार
- 12जूननिर्जला एकादशीरविवार
- 27जूनयोगिनी एकादशीसोमवार
- 11जुल॰देवशयनी एकादशीसोमवार
- 26जुल॰कामिका एकादशीमंगलवार
- 9अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीमंगलवार
- 25अग॰अजा एकादशीगुरुवार
- 8सित॰परिवर्तिनी एकादशीगुरुवार
- 23सित॰इंदिरा एकादशीशुक्रवार
- 7अक्टू॰पापांकुशा एकादशीशुक्रवार
- 23अक्टू॰रमा एकादशीरविवार
- 6नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीरविवार
- 21नव॰उत्पन्ना एकादशीसोमवार
- 6दिस॰मोक्षदा एकादशीमंगलवार
- 21दिस॰सफला एकादशीबुधवार
प्रश्न-उत्तर
2011 में कितनी एकादशी हैं?
24 — पहली पौष पुत्रदा एकादशी (रविवार, 16 जनवरी 2011), अंतिम सफला एकादशी (21 दिसंबर 2011)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।