एकादशी 2027
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 3जन॰सफला एकादशीरविवार
- 18जन॰पौष पुत्रदा एकादशीसोमवार
- 2फ़र॰षट्तिला एकादशीमंगलवार
- 17फ़र॰जया एकादशीबुधवार
- 4मार्चविजया एकादशीगुरुवार
- 18मार्चआमलकी एकादशीगुरुवार
- 2अप्रैलपापमोचनी एकादशीशुक्रवार
- 17अप्रैलकामदा एकादशीशनिवार
- 2मईवरुथिनी एकादशीरविवार
- 16मईमोहिनी एकादशीरविवार
- 1जूनअपरा एकादशीमंगलवार
- 14जूननिर्जला एकादशीसोमवार
- 30जूनयोगिनी एकादशीबुधवार
- 14जुल॰देवशयनी एकादशीबुधवार
- 29जुल॰कामिका एकादशीगुरुवार
- 12अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीगुरुवार
- 28अग॰अजा एकादशीशनिवार
- 11सित॰परिवर्तिनी एकादशीशनिवार
- 26सित॰इंदिरा एकादशीरविवार
- 11अक्टू॰पापांकुशा एकादशीसोमवार
- 25अक्टू॰रमा एकादशीसोमवार
- 10नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीबुधवार
- 24नव॰उत्पन्ना एकादशीबुधवार
- 9दिस॰मोक्षदा एकादशीगुरुवार
- 23दिस॰सफला एकादशीगुरुवार
प्रश्न-उत्तर
2027 में कितनी एकादशी हैं?
25 — पहली सफला एकादशी (रविवार, 3 जनवरी 2027), अंतिम सफला एकादशी (23 दिसंबर 2027)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।