प्रदोष व्रत 2022
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 15जन॰शनि प्रदोषशनिवार
- 29जन॰शनि प्रदोषशनिवार
- 14फ़र॰सोम प्रदोषसोमवार
- 28फ़र॰सोम प्रदोषसोमवार
- 15मार्चभौम प्रदोषमंगलवार
- 29मार्चभौम प्रदोषमंगलवार
- 14अप्रैलगुरु प्रदोषगुरुवार
- 28अप्रैलगुरु प्रदोषगुरुवार
- 13मईशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 27मईशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 12जूनरवि प्रदोषरविवार
- 26जूनरवि प्रदोषरविवार
- 11जुल॰सोम प्रदोषसोमवार
- 25जुल॰सोम प्रदोषसोमवार
- 9अग॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 24अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 8सित॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 23सित॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 7अक्टू॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 22अक्टू॰शनि प्रदोषशनिवार
- 5नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 21नव॰सोम प्रदोषसोमवार
- 5दिस॰सोम प्रदोषसोमवार
- 21दिस॰बुध प्रदोषबुधवार
प्रश्न-उत्तर
2022 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
24 — पहला शनि प्रदोष (शनिवार, 15 जनवरी 2022), अंतिम बुध प्रदोष (21 दिसंबर 2022)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।