एकादशी 2022
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 13जन॰पौष पुत्रदा एकादशीगुरुवार
- 28जन॰षट्तिला एकादशीशुक्रवार
- 12फ़र॰जया एकादशीशनिवार
- 26फ़र॰विजया एकादशीशनिवार
- 14मार्चआमलकी एकादशीसोमवार
- 28मार्चपापमोचनी एकादशीसोमवार
- 12अप्रैलकामदा एकादशीमंगलवार
- 26अप्रैलवरुथिनी एकादशीमंगलवार
- 12मईमोहिनी एकादशीगुरुवार
- 26मईअपरा एकादशीगुरुवार
- 10जूननिर्जला एकादशीशुक्रवार
- 24जूनयोगिनी एकादशीशुक्रवार
- 10जुल॰देवशयनी एकादशीरविवार
- 24जुल॰कामिका एकादशीरविवार
- 8अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीसोमवार
- 23अग॰अजा एकादशीमंगलवार
- 6सित॰परिवर्तिनी एकादशीमंगलवार
- 21सित॰इंदिरा एकादशीबुधवार
- 6अक्टू॰पापांकुशा एकादशीगुरुवार
- 21अक्टू॰रमा एकादशीशुक्रवार
- 4नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीशुक्रवार
- 20नव॰उत्पन्ना एकादशीरविवार
- 3दिस॰मोक्षदा एकादशीशनिवार
- 19दिस॰सफला एकादशीसोमवार
प्रश्न-उत्तर
2022 में कितनी एकादशी हैं?
24 — पहली पौष पुत्रदा एकादशी (गुरुवार, 13 जनवरी 2022), अंतिम सफला एकादशी (19 दिसंबर 2022)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।