एकादशी 2021
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 9जन॰सफला एकादशीशनिवार
- 24जन॰पौष पुत्रदा एकादशीरविवार
- 7फ़र॰षट्तिला एकादशीरविवार
- 23फ़र॰जया एकादशीमंगलवार
- 9मार्चविजया एकादशीमंगलवार
- 25मार्चआमलकी एकादशीगुरुवार
- 7अप्रैलपापमोचनी एकादशीबुधवार
- 23अप्रैलकामदा एकादशीशुक्रवार
- 7मईवरुथिनी एकादशीशुक्रवार
- 22मईमोहिनी एकादशीशनिवार
- 6जूनअपरा एकादशीरविवार
- 21जूननिर्जला एकादशीसोमवार
- 5जुल॰योगिनी एकादशीसोमवार
- 20जुल॰देवशयनी एकादशीमंगलवार
- 4अग॰कामिका एकादशीबुधवार
- 18अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीबुधवार
- 3सित॰अजा एकादशीशुक्रवार
- 17सित॰परिवर्तिनी एकादशीशुक्रवार
- 2अक्टू॰इंदिरा एकादशीशनिवार
- 16अक्टू॰पापांकुशा एकादशीशनिवार
- 1नव॰रमा एकादशीसोमवार
- 14नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीरविवार
- 30नव॰उत्पन्ना एकादशीमंगलवार
- 14दिस॰मोक्षदा एकादशीमंगलवार
- 30दिस॰सफला एकादशीगुरुवार
प्रश्न-उत्तर
2021 में कितनी एकादशी हैं?
25 — पहली सफला एकादशी (शनिवार, 9 जनवरी 2021), अंतिम सफला एकादशी (30 दिसंबर 2021)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।