प्रदोष व्रत 2021
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 10जन॰रवि प्रदोषरविवार
- 26जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 9फ़र॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 24फ़र॰बुध प्रदोषबुधवार
- 10मार्चबुध प्रदोषबुधवार
- 26मार्चशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 9अप्रैलशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 24अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 8मईशनि प्रदोषशनिवार
- 24मईसोम प्रदोषसोमवार
- 7जूनसोम प्रदोषसोमवार
- 22जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 7जुल॰बुध प्रदोषबुधवार
- 21जुल॰बुध प्रदोषबुधवार
- 5अग॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 20अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 4सित॰शनि प्रदोषशनिवार
- 18सित॰शनि प्रदोषशनिवार
- 4अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 17अक्टू॰रवि प्रदोषरविवार
- 2नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 16नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 2दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 16दिस॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 31दिस॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
प्रश्न-उत्तर
2021 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला रवि प्रदोष (रविवार, 10 जनवरी 2021), अंतिम शुक्र प्रदोष (31 दिसंबर 2021)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।