प्रदोष व्रत 2020
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 8जन॰बुध प्रदोषबुधवार
- 22जन॰बुध प्रदोषबुधवार
- 7फ़र॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 20फ़र॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 7मार्चशनि प्रदोषशनिवार
- 21मार्चशनि प्रदोषशनिवार
- 5अप्रैलरवि प्रदोषरविवार
- 20अप्रैलसोम प्रदोषसोमवार
- 5मईभौम प्रदोषमंगलवार
- 19मईभौम प्रदोषमंगलवार
- 3जूनबुध प्रदोषबुधवार
- 18जूनगुरु प्रदोषगुरुवार
- 2जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 18जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 1अग॰शनि प्रदोषशनिवार
- 16अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 30अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 15सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 29सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 14अक्टू॰बुध प्रदोषबुधवार
- 28अक्टू॰बुध प्रदोषबुधवार
- 13नव॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 27नव॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 12दिस॰शनि प्रदोषशनिवार
- 27दिस॰रवि प्रदोषरविवार
प्रश्न-उत्तर
2020 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला बुध प्रदोष (बुधवार, 8 जनवरी 2020), अंतिम रवि प्रदोष (27 दिसंबर 2020)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।