प्रदोष व्रत 2023
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 4जन॰बुध प्रदोषबुधवार
- 19जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 2फ़र॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 18फ़र॰शनि प्रदोषशनिवार
- 4मार्चशनि प्रदोषशनिवार
- 19मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 3अप्रैलसोम प्रदोषसोमवार
- 17अप्रैलसोम प्रदोषसोमवार
- 3मईबुध प्रदोषबुधवार
- 17मईबुध प्रदोषबुधवार
- 1जूनगुरु प्रदोषगुरुवार
- 15जूनगुरु प्रदोषगुरुवार
- 1जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 14जुल॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 30जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 13अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 28अग॰सोम प्रदोषसोमवार
- 12सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 27सित॰बुध प्रदोषबुधवार
- 11अक्टू॰बुध प्रदोषबुधवार
- 26अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 10नव॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 24नव॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 10दिस॰रवि प्रदोषरविवार
- 24दिस॰रवि प्रदोषरविवार
प्रश्न-उत्तर
2023 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला बुध प्रदोष (बुधवार, 4 जनवरी 2023), अंतिम रवि प्रदोष (24 दिसंबर 2023)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।