प्रदोष व्रत 2024
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 9जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 23जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 7फ़र॰बुध प्रदोषबुधवार
- 21फ़र॰बुध प्रदोषबुधवार
- 8मार्चशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 22मार्चशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 6अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 21अप्रैलरवि प्रदोषरविवार
- 5मईरवि प्रदोषरविवार
- 20मईसोम प्रदोषसोमवार
- 4जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 19जूनबुध प्रदोषबुधवार
- 3जुल॰बुध प्रदोषबुधवार
- 18जुल॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 1अग॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 17अग॰शनि प्रदोषशनिवार
- 31अग॰शनि प्रदोषशनिवार
- 15सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 29सित॰रवि प्रदोषरविवार
- 15अक्टू॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 29अक्टू॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 13नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 28नव॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 13दिस॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 28दिस॰शनि प्रदोषशनिवार
प्रश्न-उत्तर
2024 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला भौम प्रदोष (मंगलवार, 9 जनवरी 2024), अंतिम शनि प्रदोष (28 दिसंबर 2024)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।