एकादशी 2015
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 1जन॰पौष पुत्रदा एकादशीगुरुवार
- 16जन॰षट्तिला एकादशीशुक्रवार
- 30जन॰जया एकादशीशुक्रवार
- 15फ़र॰विजया एकादशीरविवार
- 1मार्चआमलकी एकादशीरविवार
- 16मार्चपापमोचनी एकादशीसोमवार
- 31मार्चकामदा एकादशीमंगलवार
- 15अप्रैलवरुथिनी एकादशीबुधवार
- 29अप्रैलमोहिनी एकादशीबुधवार
- 14मईअपरा एकादशीगुरुवार
- 29मईनिर्जला एकादशीशुक्रवार
- 12जूनयोगिनी एकादशीशुक्रवार
- 28जूनपद्मिनी एकादशीरविवार
- 12जुल॰परमा एकादशीरविवार
- 27जुल॰देवशयनी एकादशीसोमवार
- 10अग॰कामिका एकादशीसोमवार
- 26अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीबुधवार
- 8सित॰अजा एकादशीमंगलवार
- 24सित॰परिवर्तिनी एकादशीगुरुवार
- 8अक्टू॰इंदिरा एकादशीगुरुवार
- 23अक्टू॰पापांकुशा एकादशीशुक्रवार
- 7नव॰रमा एकादशीशनिवार
- 22नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीरविवार
- 7दिस॰उत्पन्ना एकादशीसोमवार
- 21दिस॰मोक्षदा एकादशीसोमवार
प्रश्न-उत्तर
2015 में कितनी एकादशी हैं?
25 — पहली पौष पुत्रदा एकादशी (गुरुवार, 1 जनवरी 2015), अंतिम मोक्षदा एकादशी (21 दिसंबर 2015)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।