एकादशी 2003
एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है — भगवान विष्णु का व्रत, महीने में दो बार, वर्ष में लगभग 24 (अधिक मास वाले वर्ष में 26)। तिथियाँ स्मार्त नियम से हैं: सूर्योदय पर एकादशी वाले दिन व्रत, और अगले दिन द्वादशी रहते पारण।
एकादशी की कथा और विधि पढ़ें- 14जन॰पौष पुत्रदा एकादशीमंगलवार
- 28जन॰षट्तिला एकादशीमंगलवार
- 13फ़र॰जया एकादशीगुरुवार
- 26फ़र॰विजया एकादशीबुधवार
- 14मार्चआमलकी एकादशीशुक्रवार
- 28मार्चपापमोचनी एकादशीशुक्रवार
- 13अप्रैलकामदा एकादशीरविवार
- 27अप्रैलवरुथिनी एकादशीरविवार
- 12मईमोहिनी एकादशीसोमवार
- 26मईअपरा एकादशीसोमवार
- 10जूननिर्जला एकादशीमंगलवार
- 25जूनयोगिनी एकादशीबुधवार
- 10जुल॰देवशयनी एकादशीगुरुवार
- 25जुल॰कामिका एकादशीशुक्रवार
- 8अग॰श्रावण पुत्रदा एकादशीशुक्रवार
- 23अग॰अजा एकादशीशनिवार
- 6सित॰परिवर्तिनी एकादशीशनिवार
- 22सित॰इंदिरा एकादशीसोमवार
- 6अक्टू॰पापांकुशा एकादशीसोमवार
- 21अक्टू॰रमा एकादशीमंगलवार
- 4नव॰प्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशीमंगलवार
- 20नव॰उत्पन्ना एकादशीगुरुवार
- 4दिस॰मोक्षदा एकादशीगुरुवार
- 19दिस॰सफला एकादशीशुक्रवार
प्रश्न-उत्तर
2003 में कितनी एकादशी हैं?
24 — पहली पौष पुत्रदा एकादशी (मंगलवार, 14 जनवरी 2003), अंतिम सफला एकादशी (19 दिसंबर 2003)।
एकादशी की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।