प्रदोष व्रत 2037
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 13जन॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 29जन॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 12फ़र॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 27फ़र॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 14मार्चशनि प्रदोषशनिवार
- 29मार्चरवि प्रदोषरविवार
- 12अप्रैलरवि प्रदोषरविवार
- 27अप्रैलसोम प्रदोषसोमवार
- 12मईभौम प्रदोषमंगलवार
- 26मईभौम प्रदोषमंगलवार
- 11जूनगुरु प्रदोषगुरुवार
- 25जूनगुरु प्रदोषगुरुवार
- 10जुल॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 24जुल॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 9अग॰रवि प्रदोषरविवार
- 22अग॰शनि प्रदोषशनिवार
- 7सित॰सोम प्रदोषसोमवार
- 21सित॰सोम प्रदोषसोमवार
- 6अक्टू॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 21अक्टू॰बुध प्रदोषबुधवार
- 5नव॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 20नव॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 4दिस॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 19दिस॰शनि प्रदोषशनिवार
प्रश्न-उत्तर
2037 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
24 — पहला भौम प्रदोष (मंगलवार, 13 जनवरी 2037), अंतिम शनि प्रदोष (19 दिसंबर 2037)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।