प्रदोष व्रत 2036
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 11जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 25जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 9फ़र॰शनि प्रदोषशनिवार
- 24फ़र॰रवि प्रदोषरविवार
- 10मार्चसोम प्रदोषसोमवार
- 25मार्चभौम प्रदोषमंगलवार
- 8अप्रैलभौम प्रदोषमंगलवार
- 23अप्रैलबुध प्रदोषबुधवार
- 7मईबुध प्रदोषबुधवार
- 23मईशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 6जूनशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 21जूनशनि प्रदोषशनिवार
- 5जुल॰शनि प्रदोषशनिवार
- 21जुल॰सोम प्रदोषसोमवार
- 4अग॰सोम प्रदोषसोमवार
- 19अग॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 2सित॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 17सित॰बुध प्रदोषबुधवार
- 2अक्टू॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 17अक्टू॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 1नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 15नव॰शनि प्रदोषशनिवार
- 1दिस॰सोम प्रदोषसोमवार
- 15दिस॰सोम प्रदोषसोमवार
- 30दिस॰भौम प्रदोषमंगलवार
प्रश्न-उत्तर
2036 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला शुक्र प्रदोष (शुक्रवार, 11 जनवरी 2036), अंतिम भौम प्रदोष (30 दिसंबर 2036)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।