प्रदोष व्रत 2039
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 7जन॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 22जन॰शनि प्रदोषशनिवार
- 6फ़र॰रवि प्रदोषरविवार
- 20फ़र॰रवि प्रदोषरविवार
- 8मार्चभौम प्रदोषमंगलवार
- 22मार्चभौम प्रदोषमंगलवार
- 6अप्रैलबुध प्रदोषबुधवार
- 20अप्रैलबुध प्रदोषबुधवार
- 6मईशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 20मईशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 4जूनशनि प्रदोषशनिवार
- 18जूनशनि प्रदोषशनिवार
- 3जुल॰रवि प्रदोषरविवार
- 18जुल॰सोम प्रदोषसोमवार
- 2अग॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 17अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 31अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 15सित॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 29सित॰गुरु प्रदोषगुरुवार
- 15अक्टू॰शनि प्रदोषशनिवार
- 29अक्टू॰शनि प्रदोषशनिवार
- 13नव॰रवि प्रदोषरविवार
- 27नव॰रवि प्रदोषरविवार
- 13दिस॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 27दिस॰भौम प्रदोषमंगलवार
प्रश्न-उत्तर
2039 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला शुक्र प्रदोष (शुक्रवार, 7 जनवरी 2039), अंतिम भौम प्रदोष (27 दिसंबर 2039)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।