प्रदोष व्रत 2028
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को भगवान शिव का व्रत है, उस दिन जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी हो — महीने में दो बार। वार के अनुसार इसका नाम सोम, भौम, शनि प्रदोष आदि होता है।
प्रदोष व्रत की कथा और विधि पढ़ें- 9जन॰रवि प्रदोषरविवार
- 23जन॰रवि प्रदोषरविवार
- 8फ़र॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 22फ़र॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 8मार्चबुध प्रदोषबुधवार
- 23मार्चगुरु प्रदोषगुरुवार
- 7अप्रैलशुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 22अप्रैलशनि प्रदोषशनिवार
- 6मईशनि प्रदोषशनिवार
- 21मईरवि प्रदोषरविवार
- 4जूनरवि प्रदोषरविवार
- 20जूनभौम प्रदोषमंगलवार
- 4जुल॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 19जुल॰बुध प्रदोषबुधवार
- 2अग॰बुध प्रदोषबुधवार
- 18अग॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 1सित॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
- 16सित॰शनि प्रदोषशनिवार
- 30सित॰शनि प्रदोषशनिवार
- 15अक्टू॰रवि प्रदोषरविवार
- 30अक्टू॰सोम प्रदोषसोमवार
- 14नव॰भौम प्रदोषमंगलवार
- 29नव॰बुध प्रदोषबुधवार
- 13दिस॰बुध प्रदोषबुधवार
- 29दिस॰शुक्र प्रदोषशुक्रवार
प्रश्न-उत्तर
2028 में कितने प्रदोष व्रत हैं?
25 — पहला रवि प्रदोष (रविवार, 9 जनवरी 2028), अंतिम शुक्र प्रदोष (29 दिसंबर 2028)।
प्रदोष व्रत की तारीख अलग-अलग शहरों में अलग क्यों हो सकती है?
हिन्दू दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय की तिथि (या व्रत के अनुसार चन्द्रोदय, प्रदोष काल अथवा संक्रांति के क्षण की स्थिति) से दिन तय होता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग समय होता है, इसलिए दिल्ली से दूर का शहर व्रत एक दिन आगे-पीछे रख सकता है; अपने शहर की तारीखें मासिक कैलेंडर में देखें।